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विपणन: लीची

 

विपणन - फल अत्यधिक विनाशशील होने के कारण लीची मुख्यत: ताजे रूप में स्थानीय या निकटवर्ती बाजार में बेची जाती है। फिर भी द्रुत एवं उन्नत परिवहन नेटवर्क की सहायता से इस समय इसका परिवहन दूरवर्ती बाजारों के लिए किया जा रहा है। दूरवर्ती बाजार के लिए परिवहन की शीत श्रृंखला प्रणाली का उपयोग किया जाता है। इस प्रणाली में परिवहन प्रयोजन के लिए प्रशीतित वाहनों का उपयोग किया जाता है।

1-   लीची वैज्ञानिक दृष्टी से लीची चाइनेन्सिस सोन. नाम से जानी जाती है जो सैपिन्डेसी कुल से सम्बन्धित है। इसका उत्पत्ति स्थान दक्षिण चीन माना जाता है।

2-   सामान्य विवरण - लीची का फल स्वादिष्ट, सुगन्धित, मीठा, रसीला एवं मोतिया सफेद रंग के गूदे से युक्त होता है जो विटामित 'सी' का अच्छा स्रोत है। भारत एवं चीन दोनों मिलकर विश्व लीची उत्पादन को 91 प्रतिशत का उत्पादन करते हैं परन्तु यह स्थानीय रूप में बेचा जाता है। चीन के बाद भारत का दूसरा स्थान है और 63,000 हैक्टेयर क्षेत्रफल एवं 3.81 मी0 टन की उत्पादकता के साथ सबसे अधिक उत्पादकता रखता है। भारत में लीची फल के बीच क्षेत्रफल में 7वाँ और उत्पादन में 9वाँ स्थान रखती है परन्तु मूल्य के सम्बन्ध में छठा स्थान रखती है। देश में लीची उत्पादन में प्रमुख राज्य बिहार है। असम, झारखण्ड, पंजाब, हिमाचल प्रदेश, त्रिपुरा, उत्तराखण्ड, उत्तर प्रदेश एवं पश्चिम बंगाल अन्य प्रमुख लीची उत्पादक राज्य हैं। 

 

 

 

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