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मूल तंत्र : गन्ना


मूल तंत्र

  • मूल तंत्र का कार्य दोहरा होता है:

-पहला, यह मृदा से जल एवं पोशकों के अंतर्ग्रहण में समर्थ बनाता है, और

-दूसरा, यह पौधे को सहारा प्रदान करने का कार्य करता है।

  • रोपे गए बीज खंड से दो प्रकार की जड़ें विकसित होती हैं।

जड़ पट्टी से निकलने वाली बीज खंड (सेट) जड़ें पतली एवं अधिक  शाखित होती हैं; प्ररोहों की निचली जड़  पत्तियों से उत्पन्न होने वाली प्ररोह जड़ें मोटी, गूदेदार और कम शाखित होती हैं।

  • प्रत्येक नई दोजी (प्ररोह) अपनी जड़ें विकसित करेंगी जो अंततोगत्वा मूल प्ररोह जड़ों का कार्य अधिकार में लेती हैं।
  • जड़ के सिरे की लम्बवत काट में चार हिस्से होते हैं:

(1) जड़ टोपी, (2) वर्धन शिखा, (3) दिर्घिकरण क्षेत्र, और (4) मूल रोम क्षेत्र।


root of sugarcane





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