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मलंगा- धान की फसल में एक कीट

 

मलंगा- धान की फसल में एक कीट

मलंगा धान की फसल में पाया जाने वाला एक नाम लेवा सा राष्ट्रव्यापी कीट है. पर धान की फसल में हानि पहुँचाने की स्तिथि में कभी-कभार ही पहुँचता है. यह कीट धान के पत्तों सम्मेत  पौधे के किसी भी भाग से रस चूसकर गुज़ारा कर लेता है. खानपान के मामले में इस कीट के शिशु (निम्फ) भी अपने बुजुर्गों का अनुशरण करते है. प्रौढ़ एवं निम्फ दोनों ही दुधिया दानों के रस को सबसे ज्यादा पसंद करते हैं, यही कारण है कि ये धान की फसल में बालियाँ निकलने पर ही ज्यादा दिखाई देते है. 
 इस मलंगे को अंग्रेजी जगत में Rice Gundhi Bug तथा विज्ञान जगत में leptocorisa acuta कहा जाता है. इसका वंशक्रम Hemiptera व् खानदान Coreidae है. सलोने रंग-रूप के इन प्रौढ़ों का बदन छरहरा एवं लम्बा होता है. इनकी टांगें व् एंटीने भी अच्छे-खासे लम्बे होते हैं. प्रकृति प्रदत्त इनका रंग हरिया भूरा सा तथा दर्जी के नाप अनुसार इनके शारीर की लम्बाई तक़रीबन 20  मि.मी. होती है. इनके नवजात तो बामुश्किल २ मि.मी. लम्बे तथा पीले से हरे रंग के होते हैं. पर शारीरिक वृद्धि के साथ-साथ इनका रंग भी हरे से भूरे रंग का होता जाता है.

हमारे हरियाणा में धान की फसल में यह कीट अगस्त के आखिर सी में दिखाई देने लग जाते हैं. इस कीट की मादा मधुर-मिलन के बाद पीले रंग के 24 -28  गोल-गोल अंडे पत्तों पर लाइन में रखती है. इन अण्डों से नवजात निकलने में 5 -6  दिन का समय लग जाता है तथा ये नवजात प्रौढ़ों के रूप में विकसित होने के लिए 17 -18  दिन का समय ले लेते हैं. इस दौरान ये शिशु छ: बार कांजली उतारते हैं. इस कीट का प्रौढीय जीवन 30 -32  दिन का होता है. इस कीट के प्रौढ़ एवं निम्फ सुबह-शाम ज्यादा सक्रिय रहते हैं.
     हमारे पुरखे तो छानी हुई राख का फसल पर छिडकाव करके ही इस कीट के नियंत्रण की इतिश्री कर लेते थे. पर आज कल के प्रगतिशील किसान तो बाज़ार से महंगे, नवीनतम व् घातक कीटनाशी खरीदकर फसल में प्रयोग करके ही अपनी पटरानियों को अपने कृषि ज्ञान का अहसास कराते रहते हैं. उन्हें यह मालूम नही होता कि असंख्य मांसाहारी कीट भी इन कीटों को खा-पीकर हमारी फसलों में मुफ्त में ही कीटनाशियों वाला काम करते हैं. लोपा मक्खियाँ व् डायन मक्खियाँ इस मलंगे के प्रौढ़ों का उड़ते हुए ही शिकार कर लेती हैं. किसानों ने इस कीट के प्रौढ़ व् निम्फ मकड़ियों के जाले में उलझे हुए देखे हैं. रणबीर मलिक ने हथजोड़े को इस कीट का शिकार करते हुए देखा है. रामदेवा के खेत में धान की फसल में हथजोड़े की अंडेदानी अनेक किसानों ने देखी है. आफियाना बीटल को धान की फसल में इस कीट के साथ लटोपिन हुए, रमेश ने देखा है. लेडी बीटलों के प्रौढ़ों एवं गर्बों को इस मलंगे के अंडे खाने का परहेज़ नही होता.
विभिन्न किस्म के फफुन्दीय रोगाणु भी इस कीट पर हमला करते पाए जाते हैं.
 पर अपने खेत में जारी इस प्राकृतिक कीट नियंत्रण के खेल को समय लगा कर समझे कौन?

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