Skip to main content

भूरापर्ण चित्ती


भूरापर्ण चित्ती :

रोगकारी जीव : हेल्मिन्थोस्पोरियम ओराइजी (कॉक्लियोबोलस मियाबीनस)

  •         सिलिका, पौटेषियम, मैंगनीज या मैग्नीषियम या हाइड्रोजन सल्फाइड उपस्थिति में कमी रखने वाली मृदाएं इस रोग के लिए अनुकूल होती हैं।
  •         उस मसय भूरी  चित्ती रोग भी आक्रमण करता है जब पछेती वृध्दि अवस्थाओं पर नाइट्रोजन भूरी न्यूनता कमी होती है।
  •         उस समय पौधे कम ग्रहणषील होते है जब मृदाओं में फॉस्फोरस स्तर कम होते हैं।

लक्षण :

  •         यह रोग पत्तियों एंव तुशों पर प्रकट होता है।
  •         पत्तियों  पर विषेश प्रकार की चित्तियाँ अण्डाकार, एक समान होती है और पत्ती के पृश्ठ पर समान रूप से वितरित होती हैं।
  •         छोटे या अविकसित चित्तियाँ छोटी एंव गोल होती हैं और गहरे भूरे रंग या बैंजनी  - भूरे  बिन्दुओ के रूप में प्रकट होती है जब वे पूरी तरह से विकसित होती है। तो वे धूसरया   सफेद - सा केन्द्र के साथ भूरे रंग के हो जाते है।
  •         तुषों पर काली या गहरी भूरे रंग की चित्तियाँ प्रकट होती है जो गंभीर मामलो में भूरे तुशों के ढक लेती हैं।
  •         अनुकूल जलवायु दषाओं के अंतर्गत इस चित्तियों पर गहरे रंग के कोनिडियम बीजाणु एवं कोनिडियम विकसित होते है जो उन्हें देखने में मखमल सदृष्य बनाते है।


 

0
Your rating: None

Please note that this is the opinion of the author and is Not Certified by ICAR or any of its authorised agents.