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धान में नर्सरी उगाने की विधियां

 

नर्सरी उगाने की विधियां


 

नर्सरी उगाने की तीन प्रमुख विधियां है:

1. षुश्क नर्सरी जहाँ षुश्क मृदा में सूखे बीजों की बोआई की जाती है। इस विधि का प्रयोग उन क्षेत्रों में किया जाता है जहाँ गीली नर्सरी में पोधों को उगाने के लिए पर्याप्त नहीं होता है।

 

2.  गीली नर्सरी जहाँ आर्द्र पंकिल जुताई की गई मृदा पर अंकुरित बीज की बोआई की जाती है।   सिंचित दषा के अंतर्गत गीली नर्सरियॉ पसंद की जाती है।

 

3.  डेपोग विधि। इस विधि की अनिवार्य विषेशता मृदा के साथ किसी संपर्क के बिना नर्सरी पौधें की अधिक सघन खड़ी फसल का होना है। सामान्यतया पौधे 12 से 14 दिन में रोपाई के लिए तैयार हो जाते हैं। नर्सरी क्यारियों में लगभग 40 से 60 ग्राम बीज प्रति वर्ग मीटर बोना चाहिए। एक हैक्टेयर क्षेत्रफल की रोपाई करने के लिए नर्सरी का लगभग 500 वर्ग मीटर क्षेत्र पर्याप्त होता है। नर्सरी की पछेती बोआई की स्थिति में नर्सरी क्षेत्रफल 750-1500 वर्ग मीटर तक बढ़ाना चाहिए।

 

 

 

 

 

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