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जैविक बासमती धान के लिए सस्य क्रियाओं का पैकेज

 

जैविक बासमती धान के लिए सस्य क्रियाओं का पैकेज


जैविक खेती एक वैकल्पिक कृशि है जिसे रासायनिक उर्वरकों एवं पेस्टीसाइड़ों के आगत के साथ संबध्द समस्याओं के लिए प्रस्तावित किया गया है। यह पोशक पूर्ति एवं फसल सुरक्षा के लिए रसायनों की अपेक्षा पर्यावरण पहुंच या पध्दति पर आधारित है धान खरीफ मौसम के दौरान उत्ताराखण्ड के विभिन्न कृशि जलवायु संवंधी क्षेत्रों के लिए इसकी खेती के यह महत्वपूर्ण घटक के रूप मे गुणवत्ता से युक्त प्रमुख फसल है।

धान (ओराइना सैटाइवा) : सामान्य सूचना

धान एषियाई मूल का पौध है ओराइना सैटाइवा  भारत एवं दक्षिण - पूर्ण एषिया में उगाए जाने वाली धान है।


धान का पौधा - पॉच दोनियों से युक्त धान का पौधा

दोनी एक प्ररोह होता है जिसमें जड़े, तना एवं पत्तियाँ सम्मिलित होती हैं।

इसमें पुश्प गुच्छ हो सकता है या नहीं हो सकता है।


धान का पौधा

धान के पौधों में जड़े, तना (डंठल), पत्तियाँ एवं पुश्प गुच्छ सम्मिलित होते हैं। धान अपनी वृध्दि चक्र के दौरान निम्नलिखित 10 अवस्थाओं  से होकर गजरता है :

(1.) अंकुरण एवं निर्गमन,  (2.) पौध, (3.) दोनियाँ निकलना, (4.) तना लंबा होना (5.) पुश्प गुच्छ षुरू अत: (6.) पुश्प गुच्छ विकास (7.) दूध युक्त दाना (9.) गुन्फा अवस्था (डो) का धान और (10.) परिपक्व दाना अवस्था। परंपरागत प्रजातियों को परिपक्व दाना अवस्था तक पहुँचने के लिए लगभग 150 दिनों की आवष्यकता होती है। जबकि आधुनिक, अधिक उपज देने वाली, अधिक जल्दी पकने वाली प्रजातियाँ बोआई के 90 दिनों के बाद काटी जा सकती है।



 

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