Skip to main content

जून माह के कृषि कार्य

Posted in

जून माह के कृषि कार्य

दीपाली तिवारी , गोविन्द बल्लभ पन्त कृषि एवं प्रोद्यागिकी विश्वविद्यालय पंतनगर

 


  मैदानी क्षेत्र (फसलों में)

  • उर्द व मूंग: उर्द व मूंग की पकी हुई फलियों की कटाई व चुनाई कर लें .
  • अरहर: कम अवधि में तैयार होने वाली किस्मों को नमी की कमी में पलेवा करके बुवाई कर लें .
  • मक्का: इस माह नमी के आभाव में पलेवा अवश्य करें. संकर किस्मों का बीज प्रति वर्ष नया प्रयोग करें.
  • बाजरा: बारानी क्षेत्रों में पहली मानसूनी वर्षा पर बुवाई शुरू कर दें.
  • मूंगफली: बुवाई माह के अंतिम सप्ताह में शुरू करें तथा जुलाई के प्रथम सप्ताह तक पूरी करें.
  • सोयाबीन: जून के अंतिम सप्ताह से जुलाई के प्रथम सप्ताह का समय बुवाई के लिए सर्वोत्तम है.
  • ज्वार: जून के अंतिम सप्ताह से जुलाई का प्रथम सप्ताह बुवाई के लिए सही समय है.
  • गन्ना: खरपतवार निकालते रहें तथा फसल पर मिटटी चढाएं . यूरिया की अंतिम टॉपड्रेसिंग इस माह अवश्य कर लें.
  • धान: माह के दुसरे पखवाडे से पौधों की रोपाई लाइनों में करें. खरपतवार की रोकथाम प्रारंभ से ही करें.

पर्वतीय क्षेत्र:

  • धान: बुवाई का उपयुक्त समय मई अंतिम सप्ताह से जून का प्रथम सप्ताह है. सिंचित दशा में जब पौधे को ४-५ पत्तियां निकल आवें तब रोपाई करें.
  • मुंडवा: बुवाई का उपयुक्त समय मई अंत से जून मध्य तक है.
  • झंगोरा: खेत से खरपतवार निकालने हेतु नराई करके खरपतवार पनपने न दें.
  • रामदाना: बुवाई का उपयुक्त समय मई माह के द्वितीय पखवाडे से जून का प्रथम पखवाडा है.
  • सोयाबीन: सोयाबीन को बुवाई मई के अंतिम सप्ताह से जून के दुसरे सप्ताह तक की जा सकती है.

मैदानी क्षेत्र (सब्जीयों फलों में)  

  • टमाटर: फरवरी मार्च में रोपी हुयी फसल इस माह में समाप्त होती है. बीज वाली फसल में से बीज निकालें.
  • बैगन:बीज वाली फसल से बीज निकालकर जुलाई अगस्त में रोपाई हेतु बीज पौधशाला में बोयें.
  • प्याज व लहसुन: शीघ्र खुदाई करें सुखाएं तथा नमीरहित ठंडे स्थान पर भण्डारण करें.
  • भिन्डी लोबिया व राजमा: बीज वाली फसलों से तोडी गयी फलियों को सुखाएं व बीज निकालें.
  • मिर्च: पकी हुयी मिर्च को तोड़कर सुखाएं तथा बीज निकालें. वर्षाती फसल के पौधशाला में बीज बोयें.
  • खीरावर्गीय: बीजवाले फलों से बीज निकालकर सुखाएं. बीज में ८ प्रतिशत से अधिक नमी न हो तथा खेत ऊंचा हो.
  • आम: नर्सरी में कलम बाँधने के लिया चीरा विधि का प्रयोग करें.
  • केला:पिछले माह खोदे गए गड्ढों को भरें तथा बाग़ को सिंचाई करें.
  • पपीता: अगेती किस्म के फलों को तोड़कर बाज़ार भेजें.
  • नीम्बूवर्गीय फल: फलदार पदों में नाईट्रोजन व पोटाश की दूसरी मात्र का प्रयोग करें.
  • आडू नाशपाती व आलूबुखारा: अगेती किस्मों के पके फलों को तोड़कर बाज़ार भेजें. बाग़ में जल निकास की नालियां बनायें.

पर्वतीय क्षेत्र:     

  • टमाटर: घाटी में फसल तैयार हो रही होगी, फलों को तोड़कर बाज़ार भेजें.
  • बैंगन: फलों को बाज़ार भेजें तथा ऊंचाई वाले क्षेत्रों में रोपाई करें.
  • भिन्डी, लोबिया: ऊंचाई वाले क्षेत्रों में शीघ्र ही बोआई करें. फलियों की तुडाई कर बाज़ार भजने की व्यवस्था करें.
  • खीरावर्गीय: ऊंचाई वाले क्षेत्रों में शीघ्र ही बोआई करें.
  • मूली: मध्य ऊंचाई वाले क्षेत्रों में बोआई करें. घाटियों में तैयार जड़ों को उखाड़कर बाज़ार भेजने की व्यवस्था करें.
  • अदरक, हल्दी: मध्य ऊंचाई वाले क्षेत्रों में बोआई करें.

पर्वतीय क्षेत्र:  

  • सेब: बाग़ में जल निकास की व्यवस्था करें.
  • नाशपाती: बाग़ में जल निकास की व्यवस्था करें.
  • आडू: बाग़ में जल निकास की नालियां बना लें.
  • आलूबुखारा: बाग़ में जल निकास की नालियां बना लें.
  • खुबानी: बाग़ में जल निकास की व्यवस्था करें.

 



 

 

0
Your rating: None Average: 3 (1 vote)

Please note that this is the opinion of the author and is Not Certified by ICAR or any of its authorised agents.