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चना की खेती

मुख्य बिन्दु:
१. क्षेत्रीय अनुकूलतानुसार प्रजाति का चयन कर प्रमाणित एवं शुद्ध बीज का प्रयोग करें |
२. बेसल ड्रेसिंग फास्फोरसधारी  उर्वरकों का कूड़ो में संस्तुति  अनुसार अवश्य पर्योग करें |
३. रोगों एवं फलीछेदक कीड़ों की सामयिक जानकरी कर उनका उचित नियंत्रण/उपचार किया जाय
|
४. पाइराइट जिप्सम/ सिंगल सुपर फास्फेट के रूप में सल्फर की प्रतिपूर्ति करें |
५. बीजशोधन अवश्य करें |
६. चने में फूल आते समय सिंचाई न करें |
७. देर से बुवाई हेतु शीघ्र पकने वाली प्रजाति का प्रयोग करें |
८. काबुली चने में २ प्रतिशत बोरेक्स का छिड़काव करें |
९. कीट एवं  रोग का समय सड़े नियंत्रण करें |
१०.चने की बुवाई उत्तर-दक्षिण दिशा में नहीं  करें |
११.असिंचित दशा में २% यूरिया या डी. ए. पी. का छिड़काव फूल आते समय करना चाहिए |