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घासीय वृद्धि रोग (Grassy Stunt Virus,GSV)

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घासीय वृद्धि रोग (Grassy Stunt Virus,GSV)

कारक:  माइकोप्लाजमा (Micoplasma)

विवरण: केरल में इस रोग से १९७४ में धान की फसल को काफी क्षति पहुंची पहले इसके लिए वाइरस को जनक माना जाता था, परन्तु अब धारणा है कि यह माइकोप्लाजमा (Micoplasma) से उत्पन्न रोग है (मुखेपाध्याय एवं सिहं, १९७६) यह रोग जनित बीज द्वारा फैलता है, जो भूरा तेला (Brown Plant Hopper) द्वारा संचारित होता है । रोगी पौधों को खाने के १० से २० दिन बाद भूरा तेला माइकोप्लाजमा को संचारित करता है । रोग जनक तेला में सर्वागीं हो जाता है और तब वह आयु भर रोग के जीवधारियों को संचारित करता रहता है ।

लक्षण:
स्वस्थ पौधों की पूर्ण बढ़वार होने पर भी उनका अत्यधिक बौना होना तथा दौजियाँ अधिक निकलने के लक्षणों से यह रोग पहचाना जाता है । पत्तियां छोटी तथा पतली हो जाती है, जिनका रंग पीला-हरा या पीला हो जाता है तथा गाढ़े भूरे रंग के विभिन्न आकार के दाग पाए जाते हैं । ऐसे पौधों में या तो बालियां नहीं निकलती है, यदि निकलती है तब भी उनमें दाने नहीं भरते तथा उनका रंग गाढ़ा भूरा होता है ।

 

नियंत्रण:

  • फसल का पर्यावरण स्वच्छ रखना अर्थात खरपतवार आदि को निकालते रहना । 
  • संक्रमित पौधों को उखाड़कर नष्ट करना । 
  • भूरा तेला के नियंत्रण हेतु कीटनाशी का प्रयोग करना ।
  • रोग रोधी किस्म का चुनाव करें ।
 
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