Submitted by kanchannainwal1 on Thu, 21/01/2010 - 11:02
उष्ण कटिबंधीय गन्ना क्षेत्र
- उष्ण कटिबंधीय गन्ना क्षेत्र में गन्ना कृषि - जलवायु क्षेत्र 4 (प्रायद्वीपीय क्षेत्र) और 5 (तटीय क्षेत्र) सम्मिलित होते हैं जिनमें महाराष्ट्र, आंध्र प्रदेश, तमिलनाडु, कर्नाटक, गुजरात, मध्य प्रदेश, गोवा, पांडिचेरी एवं केरल के राज्य सम्मिलित हैं।
- आंध्र प्रदेश एवं तमिलनाडु के तटीय क्षेत्रों में उच्च गन्ना उत्पादकता रखने वाले व्यापक गन्ना उत्पादक क्षेत्र हैं।
- बाढ़, जलाक्रांति (जल भराव), रोग, जैसे लाल विगलन मुख्य समस्याएं हैं।
- उष्ण कटिबंधीय क्षेत्र में गन्ना अपनी वृध्दि के लिए लगभग आदर्श जलवायु दशाएं प्राप्त करता है। अत: यह देश में कुल गन्ना उत्पादन में लगभग 40 प्रतिशत का योगदान करता है।
- उत्पादकताएं अधिक ऊँची होती हैं।
- क्षेत्र के प्रमुख राज्यों (महाराष्ट्र, तमिलनाडु, कर्नाटक, आंध्र प्रदेश एवं गुजरात) की औसत गन्ना उपजें लगभग 80 टन प्रति हैक्टैयर होती है।
- महाराष्ट्र एवं कर्नाटक के साथ संलग्न क्षेत्र, गुजरात और आंध्र प्रदेश अपेक्षाकृत अधिक शर्करा प्राप्तियाँ देते हैं।
- इस क्षेत्र में धूप के लंबे घंटे, स्वच्छ आकाश से युक्त ठंडी रातें और इसकी अक्षांशीय स्थिति शर्करा संचयन के लिए अनुकूल होते हैं। महाराष्ट्र एवं गुजरात में औसत शर्करा प्राप्तियाँ देश में सबसे अधिक ऊँची हैं।
- अधिकतर मार्च से जून के दौरान गन्ना वृध्दियों के प्रारंभिक हिस्से में आर्द्रता प्रतिबल (कमी) एक महत्वपूर्ण समस्या है।
- पठार प्रदेश एवं तटीय क्षेत्रों में गन्ना उत्पादन को प्रभावित करने वाले महत्वपूर्ण रोग क्रमश: कंड एवं लाल विगलन है॥
- विशेष रूप से देरी से बोई गई फसलों में नाशकजीवों (हानिकारक कीटों) के बीच अगेती प्ररोह वेधक का प्रकोप काफी गंभीर होता है।
