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अरहर की खेती

Source: 
Agriculture Department, Uttar Pradesh

सूत्रकृमि: सूत्रकृमि जनित बीमारी की रोकथाम हेतु गर्मी की गहरी जुताई आवश्यक है।

कम अवधी कि अरहर कि फसल में एकीकृत कीट प्रबंधन:

  1. अरहर के खेत में चिड़ियों के बैठने के लिये बांस की लकड़ी का टी आकार का १० खपच्ची प्रति हे. के हिसाब से गाड  दें।
  2. जब शत प्रतिशत पौधे में फूल आ गये हो और फली बनना शुरू हो गया हों। उस समय इन्डोसल्फान ०.०७ प्रतिशत घोल का छिड़काव करना चाहियें।
  3. प्रथम छिड़काव के १५ दिन पश्चात एच.एन.पी.वी. का ५०० एल.ई प्रति हे. के हिसाब से द्दिडकाव करना चाहियें।
  4. द्वितीय छिड़काव के १०-१५ दिन पश्चात जरूरत के अनुसार निम्बोली के ५ प्रतिशत अर्क का द्दिडकाव करना चाहिये।

मध्यम एवं लम्बी अवधि की अरहर की फसल में एकीकृत कीट प्रबन्धन :

  1. जब शत प्रतिशत पौधों में फूल आ गये हों और फली बनना शुरू हो गया हो। उस समय मोनोक्रोटोफास ०.०४ प्रतिशत घोल का छिड़काव करना चाहियें।
  2. प्रथम छिड़काव के १०-१५ दिन पश्चात डाइमेथोएट ०.०३ प्रतिशत घोल का द्दिडकाव करना चाहिये।
  3. द्वितीय छिड़काव के १०-१५ दिन पश्चात आवश्यकतानुसार निम्बोली के ५ प्रतिशत अर्क या नीम के किसी प्रभावी कीट नाशक का द्दिडकाव करना चाहियें।

मुख्य बिन्दु:

  1. बीज शोधन आवश्यक रूप से किया जाय।
  2. सिगिंल सुपर फास्फेट का फास्फोरस एवं गन्धक हेतु उपयोग किया जाय।
  3. समय से बुवाई की जायें।
  4. फली बेधक एवं फली मक्खी का नियंत्रण आवश्यक है।
  5. मेडो पर बुवाई करनी चाहिये।