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पर्णच्छद अंगमारी : धान

पर्णच्छद अंगमारी

रोगकारी जीव : राइजोक्टोनिया सोलानी (थैनेटेफोरस कुकुमेरिस)

  • उच्च आर्द्रता एवं गर्म तापमान इस रोग के लिए अनुकूल होते है।
  • निकट रोपाई एंव भारी उर्वरीकरण की रोग के आपतन को बढ़ाने की प्रवृति होती है। 

धान प्रध्वंस या सहसामारी रोग

धान प्रध्वंस या सहसामारी रोग :

रोगकारी जीव : पिरीकुलेरिया ओराइजी (मैग्नापोर्थे ग्रिसा)

  • यह वृध्दि की किसी अवस्था पर पौधों को संक्रमित करता है और पौधों की वृध्दि रोकता है।
  • यह परिपक्व पुष्पगुच्छों की संख्या, अलग-अलग दानों का भार और धान का भार एवं गुणवत्ता को घटाता है।

जीवाणु अंगमारी : धान

जीवाणु अंगमारी :

रोगकारी जीव : जैन्थोमोनास ओराइजी सीवी ओराइजी

  • 300 से0 तक उच्च तापमान रोग विकास के लिए अनुकूल होता है जबकि 200 से0 तापमान पर घट जाता है।
  • क्षतचिह्न बढ़ जाते है और अधिक उँचे तापमान पर पत्ती अधिक तेजी से मर जाती है।

हरी सींगदार सूंड़ी : धान

हरी सींगदार सूंड़ी :

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