यद्यपि धान के खेत व्यवहार में समतल एंव बराबर दिखाई देता है तो भी जल का प्रयोग खेत में सर्वत्र एक समान नहीं होता है। इसलिए उन्नत जल एवं फसल प्रबन्धन के लिए लेसर भूमि समतलन की पूर्वाश्यकता होती है।
बीज को डुबोने के लिए लवण विलयन (10-15%) तैयार किया जाता है। यह लवण सांद्रता की जांच ताजे अण्डे से की जा सकती है जो विलयन में तैरता है। इसके बाद नर्सरी डालने के लिए चुने गए बीज का लवण विलयन में डाल देना चाहिए और उसे हिलाना चाहिए और तैरने वाले बीजों को निकाल देना चाहिए। विलयन को दूसरी बाल्टी में उडेल दीजिए। विलयन में नीचे बैठे हुए बीज का चुनाव कीजिए। इस लवण विलयन का पुन: उपयोग किया जा सकता है।
प्रमुख धान उत्पादक मृदाएं उप पर्वतीय मृदाएं, पहाड़ी मृदाएं, तराई मृदाएं, कैल्सियमी मृदाएं, लाल पीली दुमट, लाल बलुई, मिश्रित लाल एवं काली मृदाएं, डेल्टा नमी युक्त की जलोद मृदाएं, मध्यम काली मृदा, परित (सेलेक्टेड) मृदा, गहरी काली मृदा, लाल दुमट मृदा, तटीय जलोदक (कछारी) मृदा और उथली काली मृदाएं है।