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मैदानी क्षेत्रों में आम के पेड़ों की देखभाल

मैदानी क्षेत्रों में आम के पेड़ों की देखभाल

1. आम हापर की रोकथाम हेतु २ ग्राम प्रति हेक्टेअर की देर से घोल का छिडकाव करें .

2. आम में चूर्णिल कवक की रोक्तःम हेतु केराथेन ०.५ ग्राम प्रति  हेक्टेअर की देर से घोल का छिडकाव करें .

सीधी बोआई : धान

धान की सीधी बोआई

यद्यपि धान के खेत व्यवहार में समतल एंव बराबर दिखाई देता है तो भी जल का प्रयोग खेत में सर्वत्र एक समान नहीं होता है। इसलिए उन्नत जल एवं फसल प्रबन्धन के लिए लेसर भूमि समतलन की पूर्वाश्यकता होती है।

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बीज उपचार: बासमती धान

बीज उपचार

     बीज को डुबोने के लिए लवण विलयन (10-15%) तैयार किया जाता है। यह लवण सांद्रता की जांच ताजे अण्डे से की जा सकती है जो विलयन में तैरता है। इसके बाद नर्सरी डालने के लिए चुने गए बीज का लवण विलयन में डाल देना चाहिए और उसे हिलाना चाहिए और तैरने वाले बीजों को निकाल देना चाहिए। विलयन को दूसरी बाल्टी में उडेल दीजिए। विलयन में नीचे बैठे हुए बीज का चुनाव कीजिए। इस लवण विलयन का पुन: उपयोग किया जा सकता है।

धान उत्पादक मोसम

धान उत्पादक मोसम:

पतझड़ कालीन धान - पूर्व खरीफ धान (मई - जून)

शीतकालीन धान - खरीफ धान

धान के आदर्श प्रारूप (आइडियों टाइप)

धान के आदर्श प्रारूप (आइडियों टाइप)

  • तना (कल्म) छोटा एवं कठोर होना चाहिए।
  • दोजियां सीधी एवं सघन होनी चाहिए।
  • इसे अधिक दोजियां उत्पन्न करने वाली प्रजाति होनी चाहिए।
  • पत्ती मोटी, छोटी एवं सीधी होनी चाहिए।
  • पुष्प गुच्छ अधिक लंबा और अधिक भारी होना चाहिए।

बीजों का चयन: बासमती धान

तराई क्षेत्र के लिए उपयुक्त प्रजातियां

काला नमक, हंसराज, वासमती सफेद बिन्दुली, तिलका चन्दन, तपोवन बासमती।

बीजों का चयन

1. बीज ऐसी समुचित प्रजाति का होना चाहिए, जो उगाने के लिए प्रस्तावित है।

प्रजातियां : बासमती धान

प्रजातियां

क्रम संख्या

प्रजातियां

धान परिस्थितिक तंत्र एवं सस्य क्रम योजन

धान परिस्थितिक तंत्र

  •  सिंचित
  • वर्शाधीन 
  1. उच्च भूमि
  2. निम्न भूमि - 
  3. उथला जल (0-50 सेमी0)

बोआई और कटाई अवधियाँ: धान

बोआई और कटाई अवधियाँ

धान : मृदाएं

धान के लिए उपयुक्त मृदाएं

     प्रमुख धान उत्पादक मृदाएं उप पर्वतीय मृदाएं, पहाड़ी मृदाएं, तराई मृदाएं, कैल्सियमी मृदाएं, लाल पीली दुमट, लाल बलुई, मिश्रित लाल एवं काली मृदाएं, डेल्टा नमी युक्त की जलोद मृदाएं, मध्यम काली मृदा, परित (सेलेक्टेड) मृदा, गहरी काली मृदा, लाल दुमट मृदा, तटीय जलोदक (कछारी) मृदा और उथली काली मृदाएं है।

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