प्रभावी बिन्दु: १. क्षेत्रीय अनुकुलतानुसार प्रजाति का चयन कर प्रमाणित बीज का प्रयोग करें | २. समय से बुवाई करें | ३. फास्फोरस एवं गंधक हेतु सिंगल सुपर फास्फेट का प्रयोग करें | ४. रतुआ के नियंत्रण हेतु ०.१% जिंक सल्फेट का प्रयोग करें |
प्रभावी बिन्दु: १. संस्तुत प्रजातियों के प्रमाणित बीज प्रयोग करें| २. संतुलित मात्रा में उर्वरक प्रयोग करें| ३. सिंचाई उपलब्धता होने पर फूल आने के समय कम से कम एक सिंचाई अवश्य करें| ४. गालमिज के नियंत्रण के लिए कली बनते समय ही किसी कीटनाशक का छिड़काव करें|