Skip to main content

Please note that this site in no longer active. You can browse through the contents.

Hindi

फल क्षय (आल्टर्नेरिया जाति, ऐस्पर्जिलस जाति, बोट्रियोडिप्लोडिया जाति, कोलेटोट्राइकम जाति)

 

फल क्षय (आल्टर्नेरिया जाति, ऐस्पर्जिलस जाति, बोट्रियोडिप्लोडिया जाति, कोलेटोट्राइकम जाति) - भण्डारण एवं परिवहन के दौरान फल क्षय लीची उत्पादकों के लिए गम्भीर समस्या बन चुका है।

लीची : शैवाल किट्ट

 

लीची बग

 

लीची बग - यह भूरे रंग का कीट है और लीची के फलों को बुरी तरह प्रभावित करता है। यह लीची के फल से रस चूसता है। गंभीर दशाओं पर छोटे फल गिर जाते हैं।

पर्ण सुरंगक और फलवेधक

 

लीची के हानिकारक कीट :


पर्ण सुरंगक और फलवेधक -

यह बिहार में लीची का प्रमुख हानिकारक कीट है। इसके लार्वा अगस्त से फरवरी तक पत्तियों में सुरंग बनाते हैं। अन्त में क्षतिग्रस्त प्ररोह मर कर गिर जाता है।

लीची में कार्यिकीय विकार

 

कार्यिकीय विकार :

(क) फल पतन :

सधाई और काट-छाँट

 

सिंचाई: लीची

 

लीची में परागण

 

परागण :

          लीची अत्यधिक पर-परागित फसल है। अलग-अलग पुष्प स्वबंध्य होता है, परन्तु इसमें पराग होता है। पुष्प के परागण के लिए मधुमक्खी, मक्खी एवं बर्र जैसे कीटों की आवश्यकता होती है।


खाद एवं उर्वरक: लीची

 

खाद एवं उर्वरक :


लीची: रोपाई की विधि

रोपाई :

भूमि की तैयारी :

Syndicate content