Source:
Agriculture Department U.P.
Soil Conditions
:
दोमट से भारी भूमि इसकी खेती के लिए अधिक उपयुक्त है। धान के बाद खाली खेती में मसूर विशेषकर बोयी जाती है।
Varieties
:
संस्तुत प्रजातियॉ : मटर की प्रजातियों का विवरण
प्रजातियॉ
उत्पादकता
(कु०/हे०)
पकने की अवधि
(दिन)
उपयुक्त क्षेत्र
विशेषतायें
पन्त मसूर-६३९
१८-२०
१३०-१३५
सम्पूर्ण उ०प्र०
द्दोटा दाना ,रतुआ रोग सहिष्णु
पन्त मसूर-४०६
१८-२०
१३५-१४०
सम्पूर्ण उ०प्र०
तदैव '
आई.पी.एल.-८१
२०-२२
१२०-१२५
बुंन्देलखण्ड
तदैव
नरेन्द्र मसूर-१
२०-२२
१३५-१४०
सम्पूर्ण उ०प्र०
रतुआ अवरोधी मध्यम दाना
डी०पी०एल०-६२
१८-२०
१३०-१३५
सम्पूर्ण उ०प्र०
दाना मध्यम बड़ा
पन्त मसूर-५
१८-२०
१३०-१३५
सम्पूर्ण उ०प्र०
मध्यम दाना रतुआ अवरोधी
पन्त मसूर-४
१८-२०
१३०-१३५
मैदानी क्षेत्र
दाने द्दोटे रतुआ अवरोधी
डी.पी.एल.-१५
१८-२०
१२५-१३०
मैदानी क्षेत्र
दाना मध्यम बड़ा रतुआ सहिष्णु।
एल-४०७६
१८-२०
१३५-१४०
सम्पूर्ण उ०प्र०
पौधे गहरे हरे रंग के कम फैलने वाले
पन्त मसूर-२३४
१६-१८
१२५-१३०
मैदानी क्षेत्र
--
पूसा वेभव
१८-२२
१३५-१४०
मैदानी क्षेत्र
--
के-७५
१४-१६
१२०-१२५
सम्पूर्ण उ०प्र०
दाना मध्यम बड़ा रतुआ सहिष्णु।
एच.यू.एल.-५७
१४-१५
१२०-१२५
पूर्वी उ.प्र.
पौधे गहरे हरे रंग के कम फैलने वाले
Field preparation
:
पहली जुताई मिट्टी पलटने वाले हल से तथा २-३ जुताइयां देशी हल से करके पाटा लगाना चाहिये।
Seed & Sowing
:
बुवाई का समय
अक्टूबर के मध्य से नवम्बर के मध्य तक इसकी बुवाई करना उपयुक्त है। पन्तनगर जीरा टिल सीड ड्रिल द्वारा मसूर की बुवाई अधिक लाभप्रद है।
बीज दर
समय से बुवाई हेतु ४०-६० किलोग्राम पिद्देती एवं उत्तेरा बुवाई के लिए ५५-७५ किलोग्राम बीज प्रति हेक्टेयर पर्याप्त है।
बीजोपचार
१० किलोग्राम बीज को मसूर के एक पैकेट २०० ग्राम राइजोबियम कल्चर से उपचारित करके बोना चाहियें।
विशेषकर उन खेतो मे जिनमे पहले मसूर न बोई गयी हो। बीजोपचार एवं रासायनिक उपचार के बाद बीजोपचार किया जाय। पी०एस०बी० का अवश्य प्रयोग करें।
Nutrient management
:
सामान्य बुवाई में २० किग्रा नत्रजन ६० किग्रा० फास्फोरस २० किग्रा० पोटाश तथा २० किग्रा० गंधक /हे. प्रयोग करें। उतेरा विधि से बुवाई के लिए २० किग्रा० नत्रजन धान की कटाई के बाद टापड्रेसिंग करें तथा फास्फोरस ३० किग्रा० को दो बार फूल आने तथा फलिया बनते समय पर्णीय द्दिड़काव करें।
Water management
:
एक सिंचाई फूल आने से पूर्व करनी चाहियें। धान के खेतों में बोई गई मसूर की फसल में यदि वर्षो न हो तो एक सिंचाई फली बनने के समय करनी चाहियें।
Weed management
:
बुवाई के २०-२५ दिन बाद एक निराई-गुड़ाई करनी चाहियें। खरपतवार नियंत्रण चना जैसा।
Disease management
:
क्र. सं.
रोग /कीट
पहचान
उपचार
१
उकठा रोग
इस रोग मे पौधो की पत्तियां क्रमशः नीचे से ऊपर की ओर पीली पड़ने लगती है। तथा पौधे की जड़े गहरे भूरे रंग की हो जाती है।
१ अवरोधी प्रजातियां बोंये।
२ जिस खेत में रोग प्रकोप अधिक हो उसमें इस फसल को ३-४ वर्ष तक नही बोना चाहिये।
३ रोग ग्रसित पौधों को उखाड़कर जला देना चाहियें। रोग रोधी पन्त एल०-६३९ पी०एल०-४०६ की बुवाई करें।
२
रतुआ रोग
पत्तियों पर नारंगी रंग के गोलाकार फफोले पड़ते है जो बाद में भूरे रंग के हो जाते है।
मटर में दिये गये उपचार की भांति करें।
३
बुकनी रोग
मटर की भांति करें।
रोग रोधी प्रजातियों की बुवाई कराई जायें
Insect pest management
:
क्र. सं.
रोग /कीट
पहचान
उपचार
४
माहू कीट
यह कीट समूह में पत्तियों तथा पौधे के अन्त कोमल भागों से रस चूसकर क्षति पहुंचाता है।
१ मिथाइल-ओं डिमेटान २५ ई०सी० १.० लीटर।
२ डाइमिथोएट ३० ई०सी० १.० लीटर।
३ इन्डोसल्फान ३५ ई०सी०१.२५ लीटर।
४ क्लोरपायरीफास २० ई०सी० ७५० मिलीलीटर।
५ क्यूनालफास २५ ई०.सी० १.०० लीटर।
६ मेलाथियान ५० ई०सी० २.०० लीटर।
७ फेनिट्रोथियान ५० ई०सी० १.०० मिलीलीटर लीटर।
८ मोनोक्रोटोफास ३६ एस०एल० ७५० मिलीलीटर
९ कार्बराइल १० प्रतिशत चूर्ण २५.०० कि०ग्रा०।
१० कार्बराइल ५० प्रतिशत घुलनशील चूर्ण १.५ कि०ग्रा०
११ फारमेथियान २५ ई०सी० १.०० लीटर।
५
फलीद्देंदक
फलियों मे द्देद करके दानो को नष्ट करता है।
मटर के फलीद्देदक की भांति उपचार करें।
Harvesting & Threshing
:
फसल पूर्ण पकने पर कटाई करें। मड़ाई के पश्चात अन्न को भण्डारण में कीटों से सुरक्षा के लिए अल्यूमिनियम फास्फाइड की दो गोली प्रति मैट्रिक टन की दर से प्रयोग में लायें।
१ क्षेत्र विशेष हेतु संस्तुत प्रजाति के प्रमाणित बीज की बुवाई समय से करें।
२ बीज शोधन अवश्य करें।
३ फास्फोरस एवं गन्धक हेतु सिंगिल सुपर फास्फेट का प्रयोग करें।
४ बीज की मात्रा/हे. दाने के आकार एवं बुंवाई के समय को ध्यान मे रखते हुये निर्धारित करें।
५ रोग का नियंत्रण समय से करें